उम्र
उम्र जिस पायदान पे, मुझें आंखें दिखा रहा हैं।
इस दौड़ में भी"इक शख़्स,दिल को लुभा रहा हैं।
सिख चुके थे हम,दुनिया की हर चालाकियां साहेब;
बड़ी बेबाकी से अनाड़ी,मुझें तब दिलवर बता रहा हैं।
मेरे तजुर्बे को आकर जैसे,यूं ख़ाक कर रहा कोई;
जैसें दिल को लग रहा हैं फिर"बच्चा बना रहा हैं।
ए आदमी तेरी भला,दुनिया में"विसात ही क्या हैं;
ये इश्क़ हैं,इसके आगे ख़ुदा भी" बौना रहा हैं।
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