पुल

 हम रोज बनातें हैं, तेरे ख़्वाब का पुल। 

जैसें सर्द मौसम और हो चिनाब का पुल। 


हम तुम्हें भूलने की यूँ कोशिश में लगें हैं;

कमरा बिखरा,बिस्तर पे हैं किताब का पुल। 


हम मिल जाते हैं वहाँ भी,जहाँ जाना न था;

हाथ ग्लास है और हर तरफ़ शराब का पुल।

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