तोहफ़ा
आप भी कोई तोहफ़ा,बेमिसाल दीजिए।
उठाइए पत्थर,मेरी तरफ उछाल दीजिए।
मुझको मेरी मोहब्बत, अब मिलनें से रहीं;
अब किस्मत के भरोसे, ये सब टाल दीजिए।
आपको मालूम कि अभी हम, तंगहाली में हैं;
वीरता की बातों से, न मुझमें उबाल दीजिए।
गर पहचानतें हैं तो, चाय तो पिलानी पड़ेगी;
दोस्त है तो कुछ रुपए, जेब में डाल दीजिए।
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