सिगरेट

 थोड़ा लेट उठते हैं,चाय लेट पीने लगें हैं।

तुमसे अलग हुए,तो" सिगरेट पीने लगें हैं।


हर कश में बिल्कुल,तुम्हारा सा ही मज़ा हैं;

हम ग़म सारा अपना,अब समेट पीने लगें हैं।


कोई चांद हाथों से मेरे,फिसल गया हो जैसें;

हम हो गए हैं इतने,के अपसेट पीने लगें हैं।


वही शहर,वही गली,वही दुकां हैं अड्डा हमारा;

दिल्ली की शाही गली,इंडिया गेट पीने लगें है।

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