गुनिया
जैसे पेंसिल गुनिया से निकल आए हैं।
जा अब हम,तेरी दुनियां से निकल आए हैं।
उसकी उंगलियों में, वो जादू हुआ करता हैं;
वो छू दें,तो"साज़ हरमुनियाँ से निकल आए हैं।
और अब तुझको मिलने का, इरादा हुआ हैं;
जब हम तेरे शहर, पूर्णियां से निकल आए हैं।
जैसे पेंसिल गुनिया से निकल आए हैं।
जा अब हम,तेरी दुनियां से निकल आए हैं।
उसकी उंगलियों में, वो जादू हुआ करता हैं;
वो छू दें,तो"साज़ हरमुनियाँ से निकल आए हैं।
और अब तुझको मिलने का, इरादा हुआ हैं;
जब हम तेरे शहर, पूर्णियां से निकल आए हैं।
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