लड़कें

 पटना, दिल्ली या हो, यहाँ इलाहाबाद के लरकें। 

मोहब्बत क्या ख़ाक करेंगे,मेरे बाद के लरकें। 


हम इश्क़ में आंखरी पीढ़ी हैं,जान समझ जाओ;

तेरे देह तक ही मरेंगे,तेरे गाँव,जात के लरकें।


अब तुम्हीं पूछ रहीं हो, क्यूँ हमनें शादी नहीं की;

जबकि ब्याहे जा चूकें हैं, सारें मेरे साथ के लरकें। 


तो "सुनो,तुमसे अलग होतें,तब न"किसी के होतें;

लो देखों,हम जैसे मर जातें है,अपनी बात पे लरकें।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मरहम

सौभाग्य

उन्वान