लड़कियां
रात रात भर किसी के कॉल पे जागी लड़कियां।
इश्क कहां समझी हैं,इश्क़ में भागी लड़कियां।
और पिता के गुरूर को, छलनी छलनी कर दिया;
चांद की तरह रहेंगी,उम्रभर"वे दागीं लड़कियां।
गौना, चौथारी, परिछावन, धनबट्टी,मुंहदिखाई;
इन सब से वंचित ही रहेंगी,वे अभागी लड़कियां।
अक्सर ज़ाहिल की ही, चक्कर में पड़ जाती हैं;
ये उम्र के पहली चढ़ान पे,हुई अनुरागी लड़कियां।
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