कसाई

 बकरी लाई गयी हो जैसे कसाई के सामनें। 

लरकी ब्याह दी गयी वैसे, बाप भाई के  सामनें। 


फ़िर दिल का सौदा हुआ हैं, अपनी ही जात में। 

इज्जत परोसी गयी हैं, अच्छी कमाई के सामनें। 


मैं बिछड़कर उन्हें ऐसे,उम्मीदन देखता रहा;

जैसे दिल उघर गया हो,अपनी तुरपाई के सामनें। 


इक उम्र, बचपना, ख्वाइशें सब यूँ खत्म हुई;

पन्ने बर्बाद हुए हो, जैसे रौशनाई के सामनें।

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