छिछोरें

 वो लरकियों को जो डालतें थे,डोरें लरकें। 

बड़े बेबाक़ से,बिंदास थे,वो थोरें लरकें। 


महबूब की बात पे, जान तक लुटा आतें थे;

कहाँ मिलेंगे अब वैसे यहाँ छीछोरे लरकें।

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